: क्या कहूँ ज़िन्दगी के बारे में एक तमाशा था, उम्र भर देखा.. जॉन एलिया उम्र तरतीब से नहीं गुज़री अपनी ठीक मिलने के वक़्त बिछड़े हम जॉन एलिया : सर ही फोड़िये निदामत में , नीद आने लगी फुरकत में ये कुछ आसान तो नही के हम, रूठ ते है अब भी मुरव्वत में।। जॉन एलिया ।।।।।।।।।।।। ज़िन्दगी किस तरह बसर होगी, दिल नही लग रहा महोब्बत में।।। *जॉन एलिया* वो है जान अब हर एक महफ़िल की , हम अब घर से कम निकलते है।।। *जॉन एलिया* क्या तकल्लुफ करे ये कहने में, जो भी खुश है हम उस से जलते है।।। *जॉन एलिया* फला से थी गजल, बेहतर फला की, फला के जख्म अच्छे थे फला से।।।।। ...