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Showing posts from October, 2018

जॉन एलिया...

‬: क्या कहूँ ज़िन्दगी के बारे में एक तमाशा था, उम्र भर देखा.. जॉन एलिया  उम्र तरतीब से नहीं गुज़री अपनी ठीक मिलने के वक़्त बिछड़े हम जॉन एलिया : सर ही फोड़िये निदामत में , नीद आने लगी फुरकत में ये कुछ आसान तो नही के हम, रूठ ते है अब भी मुरव्वत में।। जॉन एलिया ।।।।।।।।।।।। ज़िन्दगी किस तरह बसर होगी, दिल नही लग रहा महोब्बत में।।।                                    *जॉन एलिया*  वो है जान अब हर एक महफ़िल की , हम अब घर से कम निकलते है।।।                                       *जॉन एलिया* क्या तकल्लुफ करे ये कहने में, जो भी खुश है हम उस से जलते है।।।                                       *जॉन एलिया*  फला से थी गजल, बेहतर फला की, फला के जख्म अच्छे थे फला से।।।।।     ...

उड़ान हौसलें क़ि....

यूपी से चली थी,वो भारत का मान बढ़ाने, जीत कर लौटूंगी पापा ये वादे थे उसे निभाने। पर समय के कूर्क जाल से कौन था बच पाया.. तारीख थी वो ग्यारह जब वक्त भी ठहर गया था। लोगों की सोच पर तब भारत माँ भी रोइ थी। जब काटे पैर के साथ पटरी पर जब अरुणिमा सिन्हा सोई थी। उठी हताशा से थी जब वो,दिन कुछ बीत चुके थे, हुई अपाहिज अब तु अरुणिमा लोगों ने खूब कहे थे। तब मिली बछेन्द्री पाल से थी वो हिमालय पर चढ़ने की ठानी थी, सोच ही होती है अपाहिज ये बात तो उसे बतानी  थी। फिर वो वक्त भी आया जब काल भी थर्राया था.. देख  हौसला एक लड़की का हिमालय ने शीश झुकाया था। ये जीत सिर्फ जीत नहीं एक पैगाम वो लाई थी, सोच ही होती है अपाहिज ये बात उसने समझाई थी।