सरस्वती पूजा हमारे क्षेत्र में पूजा से बढ कर बहुत कुछ होता है...कितनी ही कहानियों का साक्षी होता है स्कूल का वो कैंपस.... कहानियों के बनने का सिलसिला होता है .... वो छोटी - सी पीली थैली , जिसमे ना जाने वो कितने कीमती अबीर छुपा कर रखी थी । शायद ! पूजा के बाद सभी को तिलक लगाने के लिए खरीद कर लायी होगी । मैं पीतल की थाली में मोटे -मोटे गाजर को काट कर प्रसाद बना रहा था । हम सभी विद्यार्थियों ने चंदा एकत्रित कर सरस्वती पूजा का आयोजन किये थे । कुछ बच्चे पैसे ना देकर कुछ पूजा के समान या कोई प्रसाद के लिए फल दिया था । ये वो ही गाजर थी , जिसे विक्रम ने प्रसाद के लिए अपने खेतों से उखाड़ कर लाया था। गाजर मोटी रहने के कारण हम उस गाजर के लिए उसका मजाक बना रहे थे । वो बेचारा चुप- चाप एक कोने में बैठ कर पताके काट रहा था और हम कुछ दोस्तों के साथ ठिठोली कर के प्रसाद काट रहे थे...ये अक्सर होता है इन बातों में सब खोये थे , लेकिन मेरी आँखें सिर्फ उसे ही ढूढ रही थी । हां उसे...उसका मतलब तो समझते ...