हां सच कुछ कहानियों का अधुरा छुट जाना ही अच्छा होता है उसकी मुकम्मल मुस्कान को अधुरा छोड़ जाना ही अच्छा होता जैसे उसकी चिट्ठी का आना , और बिना पढे ही तेरा मुस्कुराना... हां ये अच्छा होता है , कुछ कहानियों का अधूरा छुट जाना ही अच्छा होता है. मेरी बात का जवाब न आना ही अच्छा होता.... तेरा मुझे देख न मुस्कुराना ही अच्छा होता … हमारा आपसे न टकराना ही अच्छा होता है... कुछ कहानियों का अधूरा छुट जाना ही अच्छा होता... अक्सर कहती हैं ये तुम्हारी आँखों ने.... बहुत धोखा दे दिया और अब तुम्हें देखना अच्छा नहीं लगता... मेरी भी जिंदगी ऐसे तो है मुक्कबल.... पर तू होती तो शायद अच्छा होता..... एक मुकम्मल मुलाकात का अधूरा छूट जाना ही अच्छा होता.. कुछ कहानियों का अधूरा छूट जाना ही अच्छा होता।