सिमरिया विधानसभा क्षेत्र मेरा अपना विधानसभा क्षेत्र की चुनावी आवो-हवा पर एक नजर.......समीर की कलम
सिमरिया विधानसभा क्षेत्र में अपना विधानसभा क्षेत्र.....दुनिया भर के मुद्दों पर लिखता रहा हुं... समीक्षात्मक हो आलोचनात्मक...किसी न किसी तरह से अपनी बात रखने की कोशिस की है.... पर शायद सिमरिया और आस-पास की राजनीति से दूरी रही है...इसके कई कारण हैं....कम उम्र में क्षेत्र से कट जाना इसमें से महत्वपूर्ण है....क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था हालत ऐसी है की ज्यादातर लोग पहले पढाई और फिर नौकरी के लिए क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हैं... खैर आज दिन समस्याओं को गिनाने का नहीं राजनीति प्रिदृश्य पर चर्चा का है...झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं....
पत्रकार होने के नाते हर विधानसभा क्षेत्र की बुनियादी जानकारी हमें हो ही जाती है या यूं कहुं की काम का हिस्सा होने के कारण हम चिजों को लेकर संजिदा रहते हैं.....सिमरिया की राजनीति से हमेंशा दूरी का कारण ये भी रहा की सायद चिजों को लेकर वो समझ नहीं जो बाकी देश के बारे में हो.... राष्ट्रीय राजनीति से लेकर क्षेत्रीय तक सभी प्रोजेक्ट का पार्ट होने के कारण देश की राजनीति आवो हवा की ठिक ठाक समझ रही है...चलिये सिमरिया को जानने की कोशिश करते हैं....दो दिनों में चुनाव होने हैं आवो हवा को समझते हैं.....
सिमरिया विधानसभा का राजनीतिक इतिहास...
2000 में झारखंड गठन के बाद इस सीट पर 2005 में हुए चुनाव में भाजपा के उपेंद्र नाथ दास विधायक चुने गए। 2008 के उप चुनाव में यहां से सीपीआई के राम चंद्र राम ने जीत हासिल की। 2009 के चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के जय प्रकाश सिंह यहां से विधायक बने। इसी तरह 2014 के चुनाव में इस सीट से झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के गणेश गंजू विधायक चुने गए।
नोट-यहां गौर करने वाली बात यह है कि एक समय भाजपा का गढ़ रहने वाला यह क्षेत्र अचानक बीजेपी से दुर कैसे हो गया... उपेंद्र नाथ दास के बाद कोई भी बीजेपी प्रत्याशी जीत क्यों नहीं दर्ज नहीं कर सके?....इसका जो एक कारण मेरी समझ में आता है....वो है सिमरिया के बीजेपी कैडर में आपसी प्रतिस्पर्धा....एक दुसरे को निचा साबित करने की होड़.....टिकट बटवारे में गलत फैसले.....कई कारण हैं....जिसने क्षेत्र से बीजेपी को दुर कर दिया...
2014 के चुनाव में बीजेपी के सुजीत कुमार भारती और गनेश गंझु के बीज सिधा मुकाबला था....पहली बार मैदान में होने के कारण सुजीत को क्षेत्र की राजनीति ने अस्विकार किया....दुसरा तर्क ये भी रहा की सीमरिया में बीजेपी के आला नेताओं ने ही सुजीत भारती के प्रति अपना विश्वस नहीं जताया...जिसका नतीजा ये रहा की मोदी लहर के बावजूद भी सुजीत भारती की हार हुई और सिमरिया सीट फिर बीजेपी से दुर ही रही...
सिमरिया विधानसभा क्षेत्र सीट का महत्व...
जिले की तहसील और विकास खंड मुख्याहलय होने के चलते यह क्षेत्र जिले की राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहता है। इस इलाके में सबसे ज्यायदा आबादी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की है। इस इलाके ज्यासदातर हिस्साय भी ग्रामीण परिवेश में ढला हुआ है। जिसका सीधा मतलब है की आपको चुनाव जितने के लिए गांव का दिल जितना होगा...
2019 में सिमरिया और बीजेपी...
सिमरिया विधानसभा सीट पर तीसरे चरण में वोटिंग होनी है...जिसे लेकर तैयारियां भी जोरो पर है....सभी पार्टीयों के उम्मीदवार जीत का दावा कर रहें हैं...
सिमरिया विधानसभा सीट पर सभी उम्मीदवारों की लिस्ट:
खेमन राम अम्बेडकारते पार्टी ऑफ इंडिया, रामदेव सिंह भोगता झारंखड विकास मोर्चा, किसुन कुमार दास बीजेपी, मनोज कुमार चंद्र एजेएसयू पार्टी, शंकर रजक सपा, शंकर रजक सपा, जीतेंद्र कुमार बीएसपी, उपेंद्र नाथ बैठा महागठबंधन के प्रत्याशी हैं...
मुकाबला मुख्य रुप से किसुन कुमार दास बीजेपी, रामदेव सिंह भोगता झारंखड विकास मोर्चा, मनोज कुमार चंद्र एजेएसयू पार्टी, उपेंद्र नाथ बैठा महागठबंधन के बीच ही मना जा रहा है...
किसुन कुमार दास- बीजेपी से चुनावी मैदान में, सुजीत भारती का टिकट काट मैदान में है....साफ छवी के नेता माने जाते हैं... बीजेपी का कैडर वोट किसुन दास की ताकत है पर कोई एक क्षेत्र ऐसा नहीं जहां से एक मुस्त वोट किसुन दास को मिले...बीजेपी का किला कहे जाने वाले इटखोरी मयूरहंड में भी किसुन दास को वो समर्थन नहीं मिलने वाला....इसके दो कारण है...
पहला- स्थानिये उम्मीदवार योगेंद्रनाथ बैठा का होना
दुसरा-सुजीत भारती का टिकट कटने से भी एत वर्ग वगावत के मुड में है...
योगेंद्रनाथ बैठा-महागठबंधन के प्रत्याशी हैं..पुर्व विधायक भी रह चुके हैं...साभ छवी है..इटखोरी मयूरहंड में लिड के करने के आसार हैं....पर दल-बदलने के कारण जानता का विश्वास कितना जीत पाते हैं...ये देखने वाली बात होगी...इसके साथ ही क्षेत्र में कांग्रेस का एक जनाधार होने का फायदा भी योगेंद्रनाथ बैठा को मिलेगा..सभी क्षेत्र का समर्थन मिला तो जीत के करिब भी नजर आते हैं...
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मनोज कुमार चंद्रा- आजसू के टिकट पर मैदान में हैं....सिमरिया के इलाके में अच्छी पकड़ मानी है....ग्रामिण इलाकों का समर्थन मनोज को हमेशा ही मिलता रहा है....कई गांव को नसा से मुक्त करने के लिए अथक प्रयास भी मनोज चंद्रा के पक्ष में जाता दिखाई देता है.... के राम चंद्र राम के नाम का भी साथ मनोज चंद्रा के साथ है, लेफ्ट का कोई मजबुत प्रत्याशी न होने के कारण भावनात्म वोट भी मनोज के पक्ष में जायेगा.... राम चंद्र राम के नाम का फायदा मिलेगा...लेकिन क्षेत्र मे संगठन का आभाव सभी किये कराये पर पानी फेर सकता है......
रामदेव सिंह भोगता -झारंखड विकास मोर्चा की टिकट से चुनाव लड़ रहें हैं...... 2009, 2014 में पार्टी को क्षेत्र से जीत मिली है....क्षेत्र में पार्टी का मजबुत जनाधार है...सबसे बड़ी ताकत ये है कि हर क्षेत्र से पार्टी को वोट मिलता रहा है....इस बार भी जीत की प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं........
चुनावी मुद्दे...
इलाके ज्या्दातर हिस्सा ग्रामीण परिवेश का होने के कारण राम मंदिर, 370 जैसे मुद्दे कभी विधानसभा चुनाव में असर नहीं डालते सायद भाजपा और महागठबंधन यहां गच्चा खा जाते हैं....क्षेत्र में रोजगार, गरिबि, भुखमरी, पलायन मुख्य समस्या है....बड़े प्लांट के वादे जनता को नहीं लुभाते...चापाकल, रोड, बिजली... जैसी बुनियादी समस्या से क्षेत्र त्रस्त है....शिक्षा का घोर अभाव है...जो की कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका इस बात का अफसोस होना चाहीये... दो दिनों में मतदान है घर से बाहर निकले और मतदान में भाग लें अपना प्रत्याशी चुने अपना नेता चुने......इस क्षेत्र के बारे में अपना आकलन भी बताईये...लोकसभा को विधानसभा समझने की गलती सभी पार्टीयां यहां करती रही है और जनता उन्हें उनकी गलती का एहसास दिलाती रही है......
सिमरिया विधानसभा क्षेत्र में अपना विधानसभा क्षेत्र.....दुनिया भर के मुद्दों पर लिखता रहा हुं... समीक्षात्मक हो आलोचनात्मक...किसी न किसी तरह से अपनी बात रखने की कोशिस की है.... पर शायद सिमरिया और आस-पास की राजनीति से दूरी रही है...इसके कई कारण हैं....कम उम्र में क्षेत्र से कट जाना इसमें से महत्वपूर्ण है....क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था हालत ऐसी है की ज्यादातर लोग पहले पढाई और फिर नौकरी के लिए क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हैं... खैर आज दिन समस्याओं को गिनाने का नहीं राजनीति प्रिदृश्य पर चर्चा का है...झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं....
पत्रकार होने के नाते हर विधानसभा क्षेत्र की बुनियादी जानकारी हमें हो ही जाती है या यूं कहुं की काम का हिस्सा होने के कारण हम चिजों को लेकर संजिदा रहते हैं.....सिमरिया की राजनीति से हमेंशा दूरी का कारण ये भी रहा की सायद चिजों को लेकर वो समझ नहीं जो बाकी देश के बारे में हो.... राष्ट्रीय राजनीति से लेकर क्षेत्रीय तक सभी प्रोजेक्ट का पार्ट होने के कारण देश की राजनीति आवो हवा की ठिक ठाक समझ रही है...चलिये सिमरिया को जानने की कोशिश करते हैं....दो दिनों में चुनाव होने हैं आवो हवा को समझते हैं.....
सिमरिया विधानसभा का राजनीतिक इतिहास...
2000 में झारखंड गठन के बाद इस सीट पर 2005 में हुए चुनाव में भाजपा के उपेंद्र नाथ दास विधायक चुने गए। 2008 के उप चुनाव में यहां से सीपीआई के राम चंद्र राम ने जीत हासिल की। 2009 के चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के जय प्रकाश सिंह यहां से विधायक बने। इसी तरह 2014 के चुनाव में इस सीट से झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक के गणेश गंजू विधायक चुने गए।
नोट-यहां गौर करने वाली बात यह है कि एक समय भाजपा का गढ़ रहने वाला यह क्षेत्र अचानक बीजेपी से दुर कैसे हो गया... उपेंद्र नाथ दास के बाद कोई भी बीजेपी प्रत्याशी जीत क्यों नहीं दर्ज नहीं कर सके?....इसका जो एक कारण मेरी समझ में आता है....वो है सिमरिया के बीजेपी कैडर में आपसी प्रतिस्पर्धा....एक दुसरे को निचा साबित करने की होड़.....टिकट बटवारे में गलत फैसले.....कई कारण हैं....जिसने क्षेत्र से बीजेपी को दुर कर दिया...
2014 के चुनाव में बीजेपी के सुजीत कुमार भारती और गनेश गंझु के बीज सिधा मुकाबला था....पहली बार मैदान में होने के कारण सुजीत को क्षेत्र की राजनीति ने अस्विकार किया....दुसरा तर्क ये भी रहा की सीमरिया में बीजेपी के आला नेताओं ने ही सुजीत भारती के प्रति अपना विश्वस नहीं जताया...जिसका नतीजा ये रहा की मोदी लहर के बावजूद भी सुजीत भारती की हार हुई और सिमरिया सीट फिर बीजेपी से दुर ही रही...
सिमरिया विधानसभा क्षेत्र सीट का महत्व...
जिले की तहसील और विकास खंड मुख्याहलय होने के चलते यह क्षेत्र जिले की राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहता है। इस इलाके में सबसे ज्यायदा आबादी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की है। इस इलाके ज्यासदातर हिस्साय भी ग्रामीण परिवेश में ढला हुआ है। जिसका सीधा मतलब है की आपको चुनाव जितने के लिए गांव का दिल जितना होगा...
2019 में सिमरिया और बीजेपी...
सिमरिया विधानसभा सीट पर तीसरे चरण में वोटिंग होनी है...जिसे लेकर तैयारियां भी जोरो पर है....सभी पार्टीयों के उम्मीदवार जीत का दावा कर रहें हैं...
सिमरिया विधानसभा सीट पर सभी उम्मीदवारों की लिस्ट:
खेमन राम अम्बेडकारते पार्टी ऑफ इंडिया, रामदेव सिंह भोगता झारंखड विकास मोर्चा, किसुन कुमार दास बीजेपी, मनोज कुमार चंद्र एजेएसयू पार्टी, शंकर रजक सपा, शंकर रजक सपा, जीतेंद्र कुमार बीएसपी, उपेंद्र नाथ बैठा महागठबंधन के प्रत्याशी हैं...
मुकाबला मुख्य रुप से किसुन कुमार दास बीजेपी, रामदेव सिंह भोगता झारंखड विकास मोर्चा, मनोज कुमार चंद्र एजेएसयू पार्टी, उपेंद्र नाथ बैठा महागठबंधन के बीच ही मना जा रहा है...
किसुन कुमार दास- बीजेपी से चुनावी मैदान में, सुजीत भारती का टिकट काट मैदान में है....साफ छवी के नेता माने जाते हैं... बीजेपी का कैडर वोट किसुन दास की ताकत है पर कोई एक क्षेत्र ऐसा नहीं जहां से एक मुस्त वोट किसुन दास को मिले...बीजेपी का किला कहे जाने वाले इटखोरी मयूरहंड में भी किसुन दास को वो समर्थन नहीं मिलने वाला....इसके दो कारण है...
पहला- स्थानिये उम्मीदवार योगेंद्रनाथ बैठा का होना
दुसरा-सुजीत भारती का टिकट कटने से भी एत वर्ग वगावत के मुड में है...
योगेंद्रनाथ बैठा-महागठबंधन के प्रत्याशी हैं..पुर्व विधायक भी रह चुके हैं...साभ छवी है..इटखोरी मयूरहंड में लिड के करने के आसार हैं....पर दल-बदलने के कारण जानता का विश्वास कितना जीत पाते हैं...ये देखने वाली बात होगी...इसके साथ ही क्षेत्र में कांग्रेस का एक जनाधार होने का फायदा भी योगेंद्रनाथ बैठा को मिलेगा..सभी क्षेत्र का समर्थन मिला तो जीत के करिब भी नजर आते हैं...
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मनोज कुमार चंद्रा- आजसू के टिकट पर मैदान में हैं....सिमरिया के इलाके में अच्छी पकड़ मानी है....ग्रामिण इलाकों का समर्थन मनोज को हमेशा ही मिलता रहा है....कई गांव को नसा से मुक्त करने के लिए अथक प्रयास भी मनोज चंद्रा के पक्ष में जाता दिखाई देता है.... के राम चंद्र राम के नाम का भी साथ मनोज चंद्रा के साथ है, लेफ्ट का कोई मजबुत प्रत्याशी न होने के कारण भावनात्म वोट भी मनोज के पक्ष में जायेगा.... राम चंद्र राम के नाम का फायदा मिलेगा...लेकिन क्षेत्र मे संगठन का आभाव सभी किये कराये पर पानी फेर सकता है......
रामदेव सिंह भोगता -झारंखड विकास मोर्चा की टिकट से चुनाव लड़ रहें हैं...... 2009, 2014 में पार्टी को क्षेत्र से जीत मिली है....क्षेत्र में पार्टी का मजबुत जनाधार है...सबसे बड़ी ताकत ये है कि हर क्षेत्र से पार्टी को वोट मिलता रहा है....इस बार भी जीत की प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं........
चुनावी मुद्दे...
इलाके ज्या्दातर हिस्सा ग्रामीण परिवेश का होने के कारण राम मंदिर, 370 जैसे मुद्दे कभी विधानसभा चुनाव में असर नहीं डालते सायद भाजपा और महागठबंधन यहां गच्चा खा जाते हैं....क्षेत्र में रोजगार, गरिबि, भुखमरी, पलायन मुख्य समस्या है....बड़े प्लांट के वादे जनता को नहीं लुभाते...चापाकल, रोड, बिजली... जैसी बुनियादी समस्या से क्षेत्र त्रस्त है....शिक्षा का घोर अभाव है...जो की कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका इस बात का अफसोस होना चाहीये... दो दिनों में मतदान है घर से बाहर निकले और मतदान में भाग लें अपना प्रत्याशी चुने अपना नेता चुने......इस क्षेत्र के बारे में अपना आकलन भी बताईये...लोकसभा को विधानसभा समझने की गलती सभी पार्टीयां यहां करती रही है और जनता उन्हें उनकी गलती का एहसास दिलाती रही है......


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