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Showing posts from April, 2020

ये भूलना होगा तुम्हें, अब खुलना होगा तुम्हें

बहुत घुटी - घूटी सी रहती हो बस खुलती नहीं हो तुम खुलने के लिए जाना होगा तुम्हें बहुत पीछे एक छोटी सी बात  सायद समझती नहीं हो तुम फिर वहीं जाना होगा जहां से कंधों पर बस्ता उठा कर चलना शुरू किया था.... उस जहन को बदल एक नया जहन लगना होगा तुम्हें.... क्या गांव की लड़की हो? अब ये भूलना होगा तुम्हें अब वक़्त आ गया है खुलना होगा तुम्हें, हां अब खुलना होगा तुम्हें...