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Showing posts from January, 2019

UPSC में हिंदी भाषा के छात्रों के चयन में आई कमी का जिम्मेदार कौन ?

यूपीएससी में हिंदी भाषा के छात्रों के चयन में आई कमी का जिम्मेदार कौन ? यूपीएससी यानि भारत के उस समाज का सपना जिसके सच होने का इंतेज़ार मध्यम वर्गीय परिवार के हर बच्चे को होता है। यूपी-बिहार में तो एक कहावत भी है कि यहां के लड़कों का दिल टूटता है तो सीधा यूपीएससी निकालते हैं। पर सरकार की एक नीति ने इन सपनो और कहावतों को एक तगड़ा झटका दिया है। जिसका नाम है सीसैट(CSAT) हिंदी-भाषी  छात्रो के लिए यह किसी अभिषाप से कम नहीं आंका जा सकता। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि साल 2018 , जगह मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री रास्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी। यहां पर 370 लोग ट्रेनिंग ले रहे थे, सब के सब देश के भावी IAS थे। देश के कोने-कोने से आए IAS और इनमें हिंदी भाषा के सिर्फ और सिर्फ 8 IAS। यानि कि सफल हुए कुल छात्रों का महज 2.16 फीसदी। थोड़ा पीछे चलते हैं 2013 इसी लाल बहादूर शास्त्री प्रशसनिक अकादमी में 202 IAS  अधिकारी ट्रेनिंग ले रहे थे। जिनमें से हिंदी भाषा में परीक्षा देने वालों की संख्या थी 48 यानि कि सफल हुए कुल छात्रों का करीब 17 फीसदी। ये दो आंकड़े हैं जो यूपीएससी की तस्वीर...

एक सफर

     एक सफर ' हर दिन देश में ना जाने कितने लोग यात्रा करते हैं'। यह कहानी ऐसी हीं एक किसी अदना-सी-सफर की पृष्टभूमि पर आधारित है।,     " इस कहानी में प्यार जैसा कुछ है तो नहीं पर यह भी नहीं कह सकते हैं कि प्यार जैसा कुछ भी नहीं" बात थोड़ी अलग है समझ गये तो ठीक नहीं तो आगे बढिये।  कहानी राँची के छोटे से शहर के रेलवे स्टेशन में खड़ी NSDL- राँची राजधानी की 3rd AC के एक डिब्बे से शुरू होती है। हर दिन हर पल कितनी हीं कहानियां हमारे आँखों के सामने से गुजर जाती है, जिसकी शायद हमें खबर तक नहीं होती कुछ एक कहानियों जो हम अपनी कलम से कैद कर पाते हैं और उसे हीं शब्द देकर हमेशा के लिए अमर करना चाहते हैं। चलिए ज्यादा घूमें बिना कहानी में वापस आते हैं। क्या करिश्मा होता है न कभी-कभी किसी के मिल कर बिछुड़ने से हम खुद से नाराज हुए फिरते हैं और कभी-कभी फिर मिलेंगे की एक छोटी सी उम्मीद हमें कितना खुश कर देती है। हमारी कहानी में दो मुख्य किरदार हैं। ऐसे इस कहानी में किरदारो के नाम रखे जाय इसकी कोई खास आवश्यकता है नहीं और यही बात इसे एक कहानी बनाती है। ...