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आज कल के रिश्ते......


  .       ...आज कल के रिश्ते........



आज-कल के रिश्ते कहाँ इतने सच्चे हैं, हमे सिंगल हीं रहने दो हम सिंगल हीं अच्छे हैं।

पर यह बात लिखने के लिए एक्सपीरियंस का आना जरुरी है,
और मै-भी-कभी किसी के जुल्फों में उलझा था यह बात आपको बताना भी तो जरुरी है।

थोड़ा झगड़ा-थोड़ा प्यार और मीठी सी वो तकरार,
आखिर मुद्दतो के बाद मैंने कर हीं दिया था इजहार।

पर उन्होंने अपनी शादी पहले हीं सेट कर रखी थी, तो इंकार के सिवा मेरे हिस्से में और कुछ भी नहीं रखी थी।

मेरे इजहार और उनके इन्कार के किस्से आज भी उस कैंपस में दोहराये जाते हैं, अरसा बीत गया उस बात को  पर मेरे दोस्त आज भी उसे भाभी कह कर हीं बुलाते हैं।

रात में जाग कर उसके मैसेज का इन्तिजार करना, और उसका बहुत हीं बेरुखी से मुझे मेरे सवालो का जवाब लिखना।

कुछ रिजल्ट खराब किये फिर ये बात समझ में आई है, प्यार-मोहब्बत के चक्कर में मैंने अपनी जिंदगी के कितने हीं ख़ुशी पल गवाई है।

इसलिए तो कहता हूँ आज कल के रिश्ते कहाँ इतने सच्चे हैं, हमे सिंगल हीं रहने दो हम सिंगल हीं अच्छे है।





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