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कोचिंग का वो पहला प्यार...समीर की कलम

आज कोचिंग में मेरा पहला दिन था....हां ये भी कह सकते हैं कि एक नई दुनिया में हमारा पहला दिन था...हम दोनों क्लास में साथ ENTRY करते हैं..पूरे टशन में...जैसे अपुन इच्च भगवान है...कितना अजीब था वो...दोनो में वो जो दुसरा आदमी था न उसका नाम शिवम नाम है उसका...ये कोई पहला मौका नहीं था..जब हम किसी क्लास में पहली बार साथ इंटर कर रहे हों...आप से शुरु हुई पहचान कब तुम से तू तक पहुंची थी पता हीं नहीं चला था...अभी की ही थी तो बात थी पहले दिन क्लास जाने के एक्साइटमेंट में हम कुछ जल्दी ही कोचिंग पहुंच गए थे...कुछ फार्मीलीट्ज हुई फिर हमें हमारी सीट बता दी गई थी....हां ये अलग बात थी कि उसके साथ होने पर मैं ओवर कर देता था...ओवर तो समझते ही होंगे न क्रिकेट वाला नहीं...

               

हां तो इस आदत से मजबूर मैं कुछ ज्यादा करने की मूड में आ चुका था...पर हमें सर  की तारिफों के किस्से पहले हीं सुना दिये गए थे....जो शिवम ने मुझे फिर से याद दिलाई...मैं दुसरे बैंच पर बैठ गया...मैं मतलब हम -मैं और शिवम.....सर क्लास में आये और पढाना शुरु किया...न हमें कुछ में समझ आना था और न हीं कुछ समझ में आया...पर अच्छा जुरुर लगा....हर क्लास में हम जरुरत के हिसाब से दोस्त बना हीं लेते थे...यहां भी बन गये थे.. जिसके रीजनिंग अच्छे थे...जो अच्छा डायग्राम कर लेते थे...या जिनकी क्लास में अच्छी पहचान होती, जिसकी सर से अच्छी बनती थी...और हां ये जिम्मेदारी शिवम की ही होती क्योंकि उसे लोगों की परख अच्छी थी....
खैर कहानी में वापस आते हैं..अगले दीन सर क्लास में आये तो कहा कल टेस्ट होना है..सब तैयारी कर के आयेंगे..हमारा फेल होना पक्का था पर हमें ये नहीं पता था कि हमारे साथ इसकी फेहरिस्त काफी लंबी होगी...टेस्ट हुआ और हम फेल भी....पर चौकाने वाली बात हमारे लिए ये थी कि कुछ एक को छोड़ दिया जाय तो लगभग सारा क्लास फेल हो चुका था...पास किये लड़को का जिक्र सायद मेरी कहानी में फिर न हो क्योकि मैंने उन्हें फिर कभी नोटीस हीं नहीं किया.....





...अब पनिसमेंट की बारी थी...सब खड़े हो गये...पहला मौका था जब मैंने उसे गौर से देखा था...एवरेज टाईप ही थी...पर कुछ तो ऐसी बात थी उसमें, सारे लड़के उसकी हसी वाली चेहरे को देख रहें थे...वो अपने सहेलियों के साथ ठिठोलियां भी कर रही थी...कुछ लड़के उससे बात भी कर रहे थे,,,पर मुझमें इतनी हिम्मत कहां थी.......मैं बस लोगों की नजरों से बच कर उसे देख रहा था....तभी एक आवाज ने मुझे सपनों से बाहर निकाला..”.तुम लोग मां बाप के पैसे बर्बाद कर रहे हो यहां आ कर किसी लायक के नहीं हो” ये सर की आवाज थी...सब को बराबर पनिस्मेंट मिली....वो सर की बहन थी तो उसे थोड़ा ज्यादा हीं डांट मिल गई...वो रोने लगी और वो सायद पहला और आखिरी मौंका था..जब मैं सर से खफा हो गया था....

नाम अनामीका था..शिवम ने बताया...उसकी आंखें जैसे सागर की गहराई में सीप, होंठ जैसे बादल का छोटा सा खुबसुरत टुकड़ा जब अब उसके होंठ बन गये हों, और तो औऱ उसके होंठ को उपर एक तिल था....Which bright her face to much, Whenever I saw her I lost my self, आवज इतनी प्यारी की मानों चांदनी रात में कोई मधुर धुन सुना रहा हो.....पर ये तो मेरे ख्यालात थे...पर लड़कों के बीच उसकी इमेज थोड़ी हिटलर टाईप थी...आशीक उससे दुर रहने में ही भलाई समझते थे..........अब बारी मेरी थी..तो हुआ यूं कि शिवम ने कुछ जानकारियां इकट्ठा कर दी मेरे लिए....मसलन वो कहां से है और कहां कहां पढ़ती है, उसके देस्त कौन-कौन हैं और सबसे इम्पोर्टेंट बॉय फ्रेंड है या नहीं..उसके कॉन्टेक्ट इस मामले में हमेशा काम आते थे...उसमें कुछ सही होते थे तो कुछ बस हवा ही निकल जाते.....वो जब भी मुझे दिखती मैं उससे नजरे नहीं मिला पाता...सर्ट अपने आप ठिक हो जाती....और मुंह से गाली निकलना बंद हो जाता....और राश्ते में उसे देख लूं तो हड़बड़ा सा जाता था....हर शाम रास्ते में खड़े होकर उसे देखा करता था.....जब भी वो क्लास आती लड़के साईड पकड़ लेते...और लड़कियां में एक अलग सा विश्वास आ जाता...मैं बस एकदम शांक एक कोने में वो दिख जाये बस इतना ही काफी होता..उसके क्लास में जाने भर की देरी रहती मैं अपने फॉर्म में वापस आ जाता...

एक दिन वो कोचिंग थोड़ा जल्दी आ गई और मैं भी.. शिवम कहीं बाहर गया था तो क्लास नहीं आने वाला था...मैंने क्लास में इंटर किया तो उसने बोला ‘सुनों’ ये सुनते ही मेरे होश उड़ गए..बाल सही नहीं..सर्ट सही नहीं और न जाने क्या-क्या, तभी इसने कहा गौरव राईट...मेरा हीं नाम उसके मुंह से कितना नया सा लग रहा था..अपनी उफान मानती भावनाओं को काबू में करते हुए मैंने कहा ‘हां बोलो’ ..तुम्हारे पास कल का नोट्स है...वो लड़का जो अपने बैग में एक बूक और एक रफ कॉपी के अलावा कुछ नहीं रखता उसने भी इज्जत बचाने के लिए कह दिया...आज ले कर नहीं आया कल दे देंगे....कोचींग और कॉलेज की ये बहुत खास बात होती है बात तो नोट्स ही शुरु करवाती है...यहां भी यही हुआ....




फिर क्या मैंने जैसै तैसै नोट्स का जुगाड़ किया अगले ही दिन उसके सामने पहुंच गया...Hii , How are you, fine And you…मैंने कहा गुड..नोट्स उसने हांथ आगे बढ़ाते हुए कहा...मैं हां ये लो..मेरा नहीं है मेरी दोस्त का है...वो भी यहीं पढ़ती उसने भौच्कके से पूछा..हां शाम में मैंने कहा...अच्छा तो लड़कियों से दोस्ती रखते हो...हां वो मेरे गांव की है...तो जान पहचान है..हड़बड़ाहट में मैंने ये झुठ बोला...तुम्हारा नोट्स उसके सवाल खत्म ही नहीं हो रहे थे...मैं नोट्स नहीं बनाता मैंने सच बता दिया...अरे तो उससे लेने की क्या जरुरत थी? मुझे बता देते मैं किसी और से मांग लेती...अब मैं उसे कैसे बताता अगर पहले बता देता तो तुमसे बात कैसे होती...खैर इस बहाने ही सही हमारी थोड़ी बहुत बात होने लगी जैसे hii हेल्लो टाइप....थोड़ा विश्वास जगा तो अब उससे कुछ करवाने की बारी मेरी थी क्योंकि उसकी सीट मेरे बगल में थी तो मैंने ये काम मेरे लिए और आसान था..सर कुछ फिजिक्स का में ड्राइंग बनवा रहे थे जो बहुत ही मुश्किल था..और मेरे लिए तो कुछ ज्यादा ही तो में बस बैठे बैठे ये देख रहा था कि इसका क्या करना...तभी अनामिका ने कहा बनाते क्यूं नहीं...मैंने सपाट सा उत्तर दिया ये मेरे बस की बात नहीं है...क्यों स्कूल में ड्राइंग नहीं पढ़ाया गया, हां पढ़ाया तो गया पर मैंने नहीं पढ़ा...अनामिका ने झट से मेरी कॉपी अपने पास खींच ली...और अपनी कॉपी मुझे दे दी...अब वो मेरा काम कर रही थी और मैं बड़ी बेशर्मी से उसके नोट्स चेक कर रहा था...उसने मेरा ड्राइंग कंप्लीट कर दिया था...और मैं उसके नोट्स में लिखी हर बात पढ़ चुका था...गाना पसंद था उसे...

हमारी दोस्ती हो चुकी थी दिन बीतते जा रहे थे..बातों का सिलसिला आगे बढ़ रहा था...अब हम क्लास में खुल कर बातें कर लेते थे..हमारी दोस्ती कुछ लोगों को नागवार गुजर रही थी पर इससे हमें क्या...हम तो अपनी ही धुन में थे..कुछ बात तो थी उसमें जो मुझे उसकी ओर खींचती थी... मैं उसके खुमार में था उसे कुछ क्यूं बोलना वो तो मेरे साथ ही है कभी भी बोल दूंगा कि मैं उससे मोहब्बत करता हूं बहुत टाइम है मेरे पास.. शिवम मुझे हमेशा कहता देख भाई देर मत कर बोल थे वो न नहीं बोलेगी तेरे सिवा वो किसी और लड़के से ऐसे बात भी तो नहीं करती... पर मुझे तो इस बात का डर था अगर वो ना बोल देगी तो क्या होगा...दोस्ती भी टूट जाएगी..खैर कोचिंग के बाद हम हमेशा की तरह हॉस्टल जाते और वो किसी और क्लास के लिए निकलती तभी पीछे से आवाज़ आई "गौरव" अनामिका की आवाज़ थी मैं मुड़ा बोलो रुको मैं भी चलूंगी...तुम्हारा क्लास मैंने पूछा बेवाहियत सा सवाल...उसने तपाक से जवाब दिया बोलो तो चली जाती हूं साथ नहीं ले जाना तो, उसने हंसते हुए कहा...अरे नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था मैंने हड़बड़ाते हुए कहा...वो मुस्कुराई..तभी शिवम् ने कहा सारी बाते यही कर लोगे या रास्ते के लिए कुछ बचा लें....हमें कहां पता था हमारे पास समय के अलावा सब कुछ है इसका होश मुझे तब आया जब रास्ते म बोतों- बातों में अनामिका ने कहा यार अब तो सिर्फ 2 चैप्टर ही बचे हैं फिर टेस्ट वो फेयरवेल वक्त रेत की ही तरह निकल जाता है...यार अभी तो हम मिले थे मुझे तो उसके बारे में कुछ पता ही नहीं, मैं पूरे रास्ते इन्हीं ख्यालातों में रहा..और वो मुझे अपने बारे में बताती रही मसलन उसे चाउमिन पसंद है..समोसे वहां अच्छे मिलते हैं उसे ब्लू क्लर अच्छा लगता है, और सारी बाते जो वो बता सकती थी उसने मुझे बता दिया..की वो आगे मेडिकल पढ़ना चाहती है पर घर से शादी का प्रेशर है उसे नॉन वेज पसंद नहीं है सब पता नहीं वो बहुत हड़बड़ी में थी सब कुछ बताना चाहती थी... मैं बस चुपचाप उसे सुन रहा था...और कर भी क्या। सकता था... मैं अपने ख्यालों के उथल पुथल में था तब तक उसका हॉस्टल आ गया ...वो रुक गई और थोड़ी सहम भी गई बोली यार फेयरवेल के बाद भी हम टच में रहेंगे...शिवम् तुम्हारेे सोंग का कलेक्शन सॉलिड है साथ में ये भी कि गौरव तुम लिखते अच्छा हो यार कोई अच्छी कहानी लिखना.. मैंने मुस्कुरा दिया...वो बोली अच्छा गौरव जी चलते हैं 1 वीक़ के बाद मुलाकात होगी ..मैं क्यों कहां जा रही हो..उसने कहा घर जा रही हूं कुछ काम है..तुम अच्छे से पढ़ लेना मुझे भी बताना फिर चलो byy.....मैंने कहा byy क्यों तो उसने कहा इसमें क्या है..मैंने कहा को दिल के करीब होते हैं उन्हें byy नहीं कहते अच्छा नहीं लगता...वो मुस्कुरा कर गेट के अन्दर चली गई और मैं गेट को देखता रहा गया....

उसके गए हुए 7 दिन हो चुके थे अब तो उसे वापस आ जाना चाहिए था..मैं शिवम् से पूछ रहा था तभी फोन में मेसेज आया आज की क्लास नहीं हो पाएगी क्यूंकि मोदी जी कि सभा है..2014 मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं बने थे..पर ये बात तय हो चुकी थी कि उन्हें टक्कर देने वाला कोई नहीं...सच कहूं तो अगर मैं पत्रकार ना बना होता तो आज भक्तों की श्रेणी में पहले स्थान पर खड़ा होता...मोदी जी मुझे भी उस वक्त काफी पसंद थे ऐसा नहीं है कि मुझे अभी उनसे कोई दुश्मनी है या कोई चीड़ है पर अब वो पहले वाली बात भी नहीं...पत्रकार बनने के साथ आप पर बहुत से जिम्मेदारियां होती है बहुत सी चीजों की गंभीरता का पता चलता है जिसके बाद भक्तों वाली बात तो नहीं रहती,......मेरे साथ भी बस कुछ ऐसा ही समझ लीजिए... वो जनता के नेता तब भी थे और अब भी..उन्हें सुनने काफी भिड़ आती थी...तो हुए यूं की क्लास नहीं था तो हमने मोदी जी कि रैली देखने निकल पड़े, हमारे हॉस्टल से 1 km की ही दूरी रही होगी गांधी मैदान की...ऎसा जन सैलाब मैंने पहले कभी नहीं देखा था...तो मोदी जी के दर्शन तो नहीं हुए पर निकलते वक्त किसी ने पीछे जोर से धप्पा मारा यार रुक भी जाओ कब से आवाज़ दे रही हूं ये अनामिका थी...अरे तुम कब आई यहां, क्यों आईं भीड़ में मैंने तीन चार सवाल दाग दिए...वो बोली महाशय पानी तो पिलाइए सारे सवालों का जवाब दे दूंगी...अरे हां मैं एक पानी खरीद लाया...फिर उसने बताना शुरू किया उसे मोदी जी बहुत पसंद है, वह उन्हें काफी समय से फॉलो करती है,  उसके घर में सभी लोग बीजेपी को वोट देते हैं। और भी बहुत कुछ...हम भीड़ से आगे निकल आए थे मैंने पूछा काम होगया उसने कहा क्या काम यार सब स्यापा था...वो उखड़ सी गई फिर मैंने बात को आगे बढ़ाना ठीक नहीं समझा वो चली गई और हम भी...समय निकलता चला गया...और दोस्ती गहरी होती है अब हमारी फोन पे भी बात हो जाती थी...क्लास के आधे लोग हमें कपल भी समझने लगे थे...मैं इस बात से भी खुश था..और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था...शिवम् मुझे फिर बोलता रहा यार कब बोलेगा उसे बोल दे she is perfect for you....मुझे भी इस बात का भरोसा हो चला था कि आनामीका तो मुझे ना बोल ही नहीं सकती वो मेरी इतनी अच्छी दोस्त थी... वह हर चीज में मुझे याद करती...वो मुझे कुछ लड़कों से दूर रहने की सलाह भी देती और उनके साथ देखने पे नाराज़ भी होती... हर वक्त का पहिया चलता गया वह भी अपनी रफ्तार से और वह दिन आ गया जिसका मुझे बिल्कुल इंतजार नहीं था अगर मैं समय को पीछे कर पाता तो वह दिन कभी आने ही नहीं देता...पर समय और किसका जोर है...फेयरवेल आज हमारा फेयरवेल था...तो तय हुआ आज अनामिका को दिल की बात बतानी है...उसे बताना है कि मैं उसे कितना पसंद करता हूं..सभी से सजेशन भी चुका था अब इंतजार था तो सिर्फ उससे मिलने का पूरी रात आंखों से नींद गायब थी...और चेहरा था अनामिका का... चांद की दूधिया रोशनी में चमकते हुए तारों की तरह... अक्सर कहती थी यार भूलोगे तो नहीं...आज सारी बातों को समेटने की रात थी तो मैं उसी उथल-पुथल में था क्या बोलना है कैसे बोलना है...




सुबह हम तैयार हो चुके थे...मैंने सफेद शॉर्ट कुर्ता और जिंस पहना था... ऊपर से ब्लैक जैकेट..बिल्कुल पागल सा लग रहा था...वो रेड शूट में थी, एकदम पूरी दुनिया से अलग मानो वही जिसकी मुझे हमेशा से तलाश थी...वो मेरे पास आई बोली अच्छे लग रहे हो गौरव जी...आप भी जच रही हैं मैडम मैंने बोला..सच में उसने कहा वो थोड़ी और तारीफ सुनना चाहती थी तभी सर ने अन्दर आने को कहा, हम अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए वो सब ने अपनी अपनी बात कही कौन क्या करेगा, कहां जाना है, किसको इंजरींग करना है और मेडिकल कर रहा है, किसे बैंकिंग सेक्टर में जाना है... उसे मेडिकल करना था..सायद एक मैं ही था जिसे कुछ क्लियर नहीं था...उसने सब के सामने कहा यहां आप जैसा गुरु और गौरव जैसा दोस्त मिला मैं इस क्लास को कभी नहीं भूलूंगी...उसके आंख से आंसू निकल आए..हम भी तो इमोशनल हो गए थे..मैंने कहा सर इंजीनियर तो नहीं बनना ..ये मै बहुत बार कह चुका हूं.. सर ने कहा तो क्या करने का इरादा है गौरव बाबू..पता नहीं सर, कुछ अलग करना है कुछ समाज के लिए...अपनी सोसाइटी के लिए और कुछ अपने लिए भी...सर ने कहा कुछ करो या ना करो पर अच्छे इंसान जरूर बनना..मैंने कहा जी सर जो हुक्म, 2-4 शायरियां और 4-5 इमोशनल लाइन बोलने के बाद मैं बैठ गया मैं तो बस उसे देखना चाहता था..अनामिका को...वो सयद कुछ छुपा रही थी..उसने मेरा हांथ पकड़ लिया था ऐसे जैसे मैं छूटा जा रहा हूं ..मैंने धीरे से कहा यार मैं यहीं हूं...वो बोली सच...

हम क्लास से निकले सभी वहीं बाते कर रहे थे आगे का क्या गौरव, तू क्या करना चाहता, मेरा वही जवाब रिजल्ट का wait ...मैं चाहता था कि कब मैं अनामिका के साथ अकेले में जाऊं और उसे बताऊं कि मैं उसे कितना चाहता हूं..पर दोस्तों से बाते लंबी खींच गई...वो अपने दोस्तों के साथ थी मैं अपने...हम पूरी जिंदगी की बात आज ही कर लेना चाहते थे...तभी उसकी सहेली ने कहा गौरव अनामिका कुछ कह रही है...सभी दोस्तों ने जोर से कहा OOHHHOO गौरव जा भाई..कह दे अपनी बात…शिवम ने मेरा हांथ पकड़ लिया उसे पता था मुझे इस वक्त उसकी जरूरत है...फिर मैं अनमिका शिवम् और प्रीति साथ निकल गए..एक अनजान से रास्ते पे हम सारी बाते करना चाहते थे..सारी बातें सुनना चाहते थे...शिवम प्रीति के साथ कुछ लाने गया हम वहीं पार्क की एक पूल पर बैठ गए मैं आज उसे सब कुछ कहना चाहता था...मैंने कहा और बताव अनामिका वो बोली भूलोगे तो नहीं..मैंने कहा कैसी बात कर रही हो..वो बोली सच बताओ...मैंने एक गिफ्ट निकाला और कहा ये तुम्हारे लिए उसने कहा थैंक्यू गौरव...मैं इसे सम्हाल कर रखूंगी.. पता नहीं फिर मिले न मिले इतना कहते हुए अनामिका ने मेरा हांथ पकड़ लिया...कस कर मैंने कहा क्यों ऐसा क्यों बोल रही हो...उसने बैग से शादी का कार्ड निकाला..और एक मासूम सा सवाल पूछा... गौरव शादी में आओगे ना...उसकी आंखों में आंसू थे...वो कुछ और कहना चाहती थी पर शायद कह नहीं पाई... मैंने लड़खड़ाती जवान में पूछा इतनी जल्दी.... उसने कहा हां वह झारखंड पुलिस में है उन्हें जल्दी छुट्टी नहीं मिलती.......हम दोनों चुप थे...ये एक डरावनी खामोशी थी..हम बहुत कुछ कहना चाहते थे, करना चाहते थे, लेकिन ये वक्त का तकाजा होता है..जब आप कुछ कह नहीं पाते...हमारी खामोशी भी उसी का ईग्जाम्पल था...





आज वर्षों बाद उससे मुलाकात हुई वो भी लॉकडाउन  में...वो जरूरत मंदो को खाना देने आईं थी और मैं भी उन्हें कुछ जरूरी सामान दे रहा था...अचानक ही पीछे से आवाज़ आई क्यूं गौरव जी इतनी जल्दी भूल गए...मैं अरे तुम ..हां और ये मेरे हसबैंड है...उसने आगे बढ़ कर हांथ मिलाया..सर आपके बारे में इससे काफी सुना हुं...मैंने हंसते हुए पूछा मेरे बारे में? उसने कहा हां..कहती रहती है मेरा दोस्त है न्यूज चैनल में काम करता है...आपको सायद याद नहीं पर हम फेसबूक फ्रेंड भी हैं ...मैंने कहा ओहह नाईस टु मिट यू मिस्टर.....ताभी अनामिका बोली राजेश...मैंने दोहराया राजेश....वो थोड़ी मोटी हो गई थी और सायद संजिदा भी......लॉकडाउन जब पूरा देश परेशान है कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को जद में ले रखा है...तब कुछ मुलाकातें सूंकुं दे जाती है...हम आगे बढ़ गए...वो सायद मूड़ कर देख रही थी...



ये खयालों की बदहवासी है
या तिरे नाम की उदासी है
तुमने हमें भूलाया नहीं
बात होने को तो ये भी जरा सी है
समीर सिन्हा

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